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Dantewada. दंतेवाड़ा। बस्तर संभाग का दंतेवाड़ा जिला अपनी प्राकृतिक सुंदरता, ऐतिहासिक नगरी बारसूर, प्राचीन मंदिरों, भव्य तालाबों और अद्भुत स्थापत्य कला के लिए प्रसिद्ध है। जिले में पर्यटन को बढ़ावा देने और इसे पर्यटन के नक्शे पर स्थापित करने के लिए जिला प्रशासन लगातार कई पहलों को क्रियान्वित कर रहा है। इसी क्रम में कलेक्टर देवेश कुमार ध्रुव ने गुरुवार को विभिन्न पर्यटन स्थलों का निरीक्षण किया और विकास कार्यों का जायजा लिया। निरीक्षण के दौरान कलेक्टर ने ग्राम कुम्हाररास डेम, फरसपाल स्थित ढोलकल क्षेत्र, बारसूर के मुचनार परिसर, टूरिस्ट कॉटेज और जिप लाइन सहित अन्य प्रमुख स्थलों का दौरा किया। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि डेम के आसपास समग्र पर्यटन सर्किट विकसित किया जाए। इस योजना के तहत होमस्टे सुविधा, बोटिंग, आकर्षक कैंटीन, स्थानीय बांस और माटीकला आधारित उत्पादों की प्रदर्शनी, सेल्फी प्वाइंट, नेचर ट्रेल और बच्चों के मनोरंजन क्षेत्र विकसित किए जाएंगे। कलेक्टर ने कहा कि इससे पर्यटकों को प्राकृतिक सौंदर्य के साथ-साथ स्थानीय संस्कृति, परंपरा और हस्तशिल्प का भी अनुभव प्राप्त होगा।
उन्होंने आगे कहा कि आराध्य देवी मां दन्तेष्वरी के दर्शन के लिए आने वाले श्रद्धालुओं को देखते हुए जिले के अन्य पर्यटन क्षेत्रों में भी सुविधाओं का विकास किया जाएगा। इस पहल से धार्मिक आस्था के साथ-साथ जिले की कला-संस्कृति और साहसिक पर्यटन के क्षेत्र में भी पर्यटकों को आकर्षित किया जाएगा। स्थानीय युवाओं और महिला समूह को पर्यटन से संबंधित प्रशिक्षण और संचालन की जिम्मेदारी दी जाएगी, जिससे रोजगार और स्वरोजगार के नए अवसर सृजित होंगे। कलेक्टर ने फरसपाल ढोलकल पहाड़ी क्षेत्र और डेम में निर्माणाधीन पर्यटन परियोजनाओं का भी निरीक्षण किया। उन्होंने साफ-सफाई, पर्यावरण संरक्षण और पार्किंग व्यवस्था पर विशेष जोर दिया। कलेक्टर ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि सभी विभाग आपसी समन्वय के साथ कार्य करें ताकि विकास कार्यों में गुणवत्ता और समयबद्धता सुनिश्चित हो। ग्रामीणों द्वारा कुम्हाररास क्षेत्र में छोटे-छोटे निर्माण कार्यों की मांग पर भी कलेक्टर ने जनपद सीईओ को त्वरित कार्रवाई करने के निर्देश दिए।
इसके अलावा, बेहतर लाइटिंग व्यवस्था, सुरक्षा प्रबंधन और आधारभूत सुविधाओं के विस्तार पर भी ध्यान देने को कहा गया। कलेक्टर ने मुचनार घाट का दौरा कर नए पर्यटन सुविधाओं की संभावनाओं पर चर्चा की और बारसूर की ऐतिहासिक जिप लाइन और पर्यटक कॉटेज का निरीक्षण कर आवश्यक निर्देश दिए। इस पहल से जिले में पर्यटन गतिविधियों को बढ़ावा मिलेगा और स्थानीय युवाओं और ग्रामीणों के लिए रोजगार एवं स्वरोजगार के अवसर उत्पन्न होंगे। होमस्टे संचालन, हस्तशिल्प बिक्री, स्थानीय व्यंजन, गाइड सेवा और बोटिंग जैसी गतिविधियों से ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलेगी। इस दौरान डीएफओ रामकृष्णा रंगनाथ वाय, सीईओ जयंत नाहटा, वन विभाग, पर्यटन विभाग, जनपद पंचायत के अधिकारी और स्थानीय ग्रामीण मौजूद थे। कलेक्टर ने स्पष्ट किया कि पर्यटन विकास न केवल जिले के आर्थिक विकास में सहायक होगा, बल्कि स्थानीय संस्कृति और परंपरा को भी संरक्षित करेगा।
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